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धीरे-धीरे हम भी दुनिया का हुनर सीख गए

मुसाफिर से पूछिए

समझदारी ज़िंदगी को बेरंग बना देती है

और धीरे-धीरे करके

कैसे तुम्हें सुनाऊँ मैं अंतर्मन का नाद

तेरा मेरा रिश्ता 🧡

यूं कब तलक अपनी बेचैनियां छुपाओगे

मालूम है उसे अगला वार कहां करना है

हर चाहत का मतलब इश्क़ नहीं होता

यही मेरा अभिशाप है, यही मेरा वरदान है

लोग कहते हैं तुम्हारा अंदाज़ शायराना हो गया है

ये कैसी चुप-चाप मोहब्बत