मेरे सिवा शायर कई और भी हैं

इस जहाँ में मेरे सिवा शायर कई और भी हैं
खामोशियाँ हैं कहीं तो कहीं-कहीं शोर भी हैं

मनचला या आवारा बन जाऊँ ये सोचता हूँ
लेकिन मेरे इस दिल में किसी और का ज़ोर भी है

तन्हाइयों से टूटना शायद मैंने सीखा ही नहीं
इसीलिए शायद मेरा ये दिल कठोर भी है

हर रोज़ उसी चिलमन की आड़ है आंखों पर
वही मेरा वैराग्य है, वही मेरी चितचोर भी है

आ गले लगा लूं तुझे भुला दूं तेरे सारे ग़म
बाहर से सख्त हूँ पर भीतर से दिल उतना कमज़ोर भी है

अहसास तेरी चाहत का मेरी धड़कनों में अब भी है
मगर तू क्यों समझेगी इसे तू बड़ी मग़रूर भी है

• राम

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