
मोहब्बत में कहां किसको
कोई भी भूल पाता है
कि जितना भूलना चाहूं
वो उतना/चेहरा याद आता है
करो कितनी भी कोशिश मैं
उसे दिल से मिटाने की
मैं जितना दूर जाता हूं
वो उतना पास आता है
कि ख्वाबों में भी न भूलूं
हकीकत में कहां मुमकिन
उसी के गीत मेरा मन
हमेशा गुनगुनाता है
• राम
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