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कोई चुपके-चुपके कहता है

मैं तो कहता हूँ वापस मत आना...!!!

तुम एक बार आकर समझा दो दिल को

... अब अच्छा हो गया कैसे?

आवाज़...

ज़रूरत क्या थी..?

कोई दिल चुराए तो क्या कीजिए

बहुत याद आया...

मुझे काश कोई दीवाना मिले!

भीगी पलकों ने लूटा मेरा दामन!

तकलीफ़ों के पुतले हैं हम...

अपना सबकुछ गंवा के बैठ गए...

गुमनाम ने खोने न दिया...