Posts

उसकी आँखें कुछ कहती हैं...

जब मैंने पहली बार तुम्हें देखा था

कोई चुपके-चुपके कहता है

एक ग़ज़ल : झूठी आस बंधाने वाले

मोहब्बत...

मैं तो कहता हूँ वापस मत आना...!!!

तुम एक बार आकर समझा दो दिल को

वो ख़फ़ा है अब भी..!

आँखों में बसा ले मुझको

जग सूना-सूना लगता है

तेरे सिवा कुछ भी नहीं

ज़िंदगी को जुबान दे देंगे

सपने...

मुस्कुराना है मेरे होंठों की आदत में शुमार

तुझपे फ़िदा क्या करूं

इस क़दर उसका ऐतबार किया

फिर से तू बच्चा कर दे...

शिकवा कोई दरिया की रवानी से नहीं...

... अब अच्छा हो गया कैसे?

याद आऊंगा