
किसी की याद में खुद को भुला के बैठ गए
किसी बेवफा से दिल लगा के बैठ गए
*किसी बेवफा से दिल लगा के बैठ गए
पास के फायदों की खातिर हम
दूर के चोट खाके बैठ गए
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बरस रही थी फिजा में शवाब जब एक दिन
बरस रही थी फिजा में शवाब जब एक दिन
उसी फिजा में हम अपने हाथ जला के बैठ गए
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कौन कहता है जान जाती है
हम खुद सबों को बता के बैठ गए
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उसकी चाहत में हो गए तन्हां
अपना सबकुछ गंवा के बैठ गए
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कहते थे वो कि मेरे अपने हैं
वो हमसे जी छुड़ा के बैठ गए
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किसी की याद में खुद को भुला के बैठ गए
किसी की याद में खुद को भुला के बैठ गए
सरेआम किसी बेवफा से दिल लगा के बैठ गए
Comments
likhte rahiye...keep it up
वो हमसे जी छुड़ा के बैठ गए
Sundar alfaaz!