अब न आरज़ू है न तमन्ना है कोई
दिल में आकर समा गया कोई
सदियों से जिसका इंतज़ार था गौतम
दिल में आकर समा गया कोई
सदियों से जिसका इंतज़ार था गौतम
वो एक पल में खत्म कर गया कोई
अक्सर सोचता रहता था मैं तन्हाई में
मुझे आज तक क्यों नहीं मिला कोई
वो आई ज़िंदगी में फूल खिल गए लाखों
उजाड़ बाग़ को गुलशन बना गया कोई
अक्सर सोचता रहता था मैं तन्हाई में
मुझे आज तक क्यों नहीं मिला कोई
वो आई ज़िंदगी में फूल खिल गए लाखों
उजाड़ बाग़ को गुलशन बना गया कोई
ये अगर सपना है तो भी रहे सदा मेरा
जागते प्यार का ख्वाब दिखा गया कोई
आज इस दिल ने भी धड़कना सीख लिया
मेरी धड़कनें अपनी सांसों से बढ़ा गया कोई
जागते प्यार का ख्वाब दिखा गया कोई
आज इस दिल ने भी धड़कना सीख लिया
मेरी धड़कनें अपनी सांसों से बढ़ा गया कोई
• राम
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