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इसीलिए तो हमें अपनी लेखनी पर नाज़ है

कोई साथ न दे तो मुझसे कहना

कोई मलाल होता है क्या

चम्मच भरका प्यार

मैं चाहूं बस तेरी मुस्कान

तुम किताबों सी बिल्कुल मत बनना

वो ही क्यों चाहिए जो कोसों दूर पड़ी होती है

ॐ 2026 की पहली रचना

ये कहने को केवल नया साल है

मैं जितना दूर जाता हूं वो उतना पास आता है

हम मिले हैं किसी न किसी मोड़ पर

तुम मेरे पास न आती तो बड़ा अच्छा था

जो कह न सके वही खलता रहा

कहां तक साथ दोगी तुम

हार जाऊं मैं वो सबकुछ जिसमें तेरी जीत हो

ये कविता उस लड़की पर

ये ऑफिस वाले नाते

वन चले राम रघुराई

जिसमें तू राजी उसी में मैं राजी

तीन क्षणिकाएं...