वो ही क्यों चाहिए जो कोसों दूर पड़ी होती है



ज़िंदगी जब कभी दोराहे पे खड़ी होती है
दिल और दिमाग के बीच जंग बड़ी होती है

चाहिए दोनों मगर चुनना एक को पड़ता है
मेरी मानो तो बड़ी मुश्किल की घड़ी होती है

पता सब है फिर भी फितरत नहीं सुधरती अपनी
उसी की आस रहती है जो बहुत दूर खड़ी होती है

हाल ए दिल उसका भी कुछ अपनी तरह होता है
और वो भी अपने दिल-दिमाग से खूब लड़ी होती है

ये चक्कर क्यों नहीं आता समझ इंसानों को
वो ही क्यों चाहिए जो कोसों दूर पड़ी होती है

• राम

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