ये कहने को केवल नया साल है



वही हाल अपने वही चाल है
ये कहने को केवल नया साल है
वतन की तरक्की है ये देखिए
सड़कों की उधड़ी यहां खाल है

वो चूल्हे में हांडी चढ़ी अश्क की
न खाने को चावल न ही दाल है
पसीने की बूंदें यूं रो रो कहें
परिश्रम यहां सबसे कंगाल है

गरीबी ने तन इस कदर ढंक लिया
अमीरी का चोला फटेहाल है
यहां प्रेम दिखता नहीं भाव में
बना ऐसा ईर्ष्या का जंजाल है

अंगूठा के छापे चढ़े गद्दी पर
डिग्रीवाले बेचारे ये पामाल हैं
कोई जो फंसा रंगेहाथों यहां
कहने लगा किसी की चाल है

आगे लिखूं क्या मेरे दोस्तों
चलेगा पता ये नया साल है

• राम

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