ये ऑफिस वाले नाते
कुछ खट्टे कुछ मीठे
कुछ तीखे कुछ फीके
हर रंग है इनमें दुनिया का
हर राग है इनमें सरगम का
कभी धूप धूप
कभी छांव छांव
कभी आसमान
कभी पांव पांव
हम घर से ज़्यादा
ऑफिस में वक़्त
अपना बिताते हैं
दिनभर की आपाधापी
में एक-दूजे में खो जाते हैं
कभी लड़ते कभी झगड़ते हैं
कभी बात-बात पे अड़ते हैं
लेकिन जब कठिन समय आए
डटकर खड़े भी रहते हैं
है भावनाओं का मेल यहां
कितना कुछ संग में सहते हैं
इनमें कोई भाई है कोई बहन
कोई ताऊ कोई चाचा है
कोई गुरु तो कोई चेला है
कोई वयोवृद्ध कोई बच्चा है
कभी किसी में दिखता मित्र यहां
कभी खुद का दिखता चित्र यहां
कोई साथी ऐसा मिलता है
जो चाक गिरेबां सिलता है
कभी प्रेम यहां मिल जाता है
जिससे जीवन खिल जाता है
ये ऑफिस वाले नाते भी
परिवार का ही तो हिस्सा हैं
जो कभी नहीं होगा इतिश्री
ये वो हसीन सा किस्सा हैं
• राम

Comments