ये कविता उस लड़की पर



ये कविता उस लड़की पर 
जो मेरी अपनी लगती है 
ये कविता उस लड़की पर
जो मेरी रचना रचती है
उसे देखके मेरी नजरें हों 
एक टक एक टक एक टक एक टक
उसे सुनते ही धड़कन बोलें
धक धक धक धक धक धक

ये कविता उस लड़की पर 
जो मुझको बेहद फबती है
ये कविता उस लड़की पर
जो राहें मेरी तकती है

उसका आना जैसे कोई 
शोख सी महफ़िल सज जाए
उसका जाना ऐसे जैसे
जिस्म से जान चली जाए
ये कविता उस लड़की पर 
जो मेरे मन को भाती है
ये कविता उस लड़की पर
जो मुझ पर रौब जमाती है

मेरे मन के सिंहासन पर 
बस उसका ही शासन है
उसे चाहना उसे सोचना
अब यही मेरा अनुशासन है
ये कविता उस लड़की पर
जो जीना मुझे सिखाती है
ये कविता उस लड़की पर
जो मुझसे ही शरमाती है

Climax 01
बस एक विपत्ति खड़ी यहां
उससे मिलने में बाधा है
मैं भले ही उसका कृष्ण नहीं
वो मेरे मन की राधा है

Climax 02
मैं थोड़ा नटखट बंदा हूं
उसका मिजाज़ कुछ सादा है
मैं उसका कृष्ण कहाता हूं
वो मेरे मन की राधा है

ये कविता उस लड़की पर
जो युगों युगों की चाहत है
ये कविता उस लड़की पर
जो पूर्व जन्म की साथी है

• राम

Comments