मैं चाहूं बस तेरी मुस्कान



राधा की आंख में आंसू आए
कृष्ण की निकली जान
दिल दिमाग पर छाया है
सिर्फ उसी का ध्यान

कृष्ण की सांसें उखड़ रही हैं
बड़े कष्ट में प्राण
फिर कृष्ण के मन की पीड़ा
से क्यों राधा है अनजान

बस तेरी मुस्कान चाहिए
नहीं कोई परवाह
तुझमें मुझको रब दिखता है
तू है मेरी चाह

मैंने तेरा हृदय दुखाया
मैं तेरा अपराधी हूं
जो चाहे इंसाफ करे तू
मैं फांसी में भी राजी हूं

मुझको तेरी कितनी चिंता
कैसे तुझे बताऊं
तू कह दे तो चीर के सीना
दुनिया को दिखलाऊं

छोड़ दे गुस्सा अब हंस दे
दर पे तेरे खड़ा हूं
तेरी एक मुस्कान को राधे
मैं तेरे चरण पड़ा हूं

हे राधा है ये वादा
अब फिर से ये न होगा
जो चाहे मुझसे ले ले
मैं चाहूं बस तेरी मुस्कान

• राम

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