तू कौन है मेरी
इबादत पूजा मन्नत
दुआ प्रार्थना या अरदास
कुछ भी नहीं है तो मुझको
क्यों है इतना विश्वास
निश्चित ही तेरा मुझसे है
पहले का कोई न कोई नाता
अन्यथा यूं ही कोई किसी को
इतना नहीं सुहाता
फिर कुदरत के पास भी तो
नहीं है इतना समय
कि वो सामने आकर
दिलाए एहसास
कि हम मिले हैं
किसी न किसी मोड़ पर
खुद महसूस करके देखो
सब पता चल जाता है
वरना अरबों खरबों की
दुनिया में
क्या कोई किसी से
ऐसे ही मिल जाता है
• राम

Comments