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हर दिन मैं रचता हूँ एक कविता तुम्हारे लिए

आज हर होनी अनहोनी हो रही है

ज़िन्दगी तूने बहुत रोज़ बचाया मुझको

सुनेगा तेरी अरदास वो बड़े इत्मीनान से

मेरा पथरीला दिल...

कैसे कह दूँ कि वो पराया है

तुम्हें बिसराना चाहता हूं सदा के लिए

तुमसे संवाद की भाषा

लिखना ही भूल गया ऊपर वाला तुम्हें हमारी किस्मत में

फिर वो मुझसे पूछती है

उसकी आँखें कुछ कहती हैं...

बस इतना कर दो वायुपुत्र

हम क्या मिस कर रहे हैं