फिर वो मुझसे पूछती है

मैं उस पर जो रचनाएं लिखता हूं
शब्दों में जब उसको मैं दिखता हूं
फिर वो मुझसे पूछती है

इतने प्रेममयी प्रस्ताव कहां से लाते हो
मन में इतने सुंदर भाव कहां से लाते हो
दूर-दूर तक दुख की ऊंची लहरें हैं 
तुम तूफानों में नाव कहां से लाते हो

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