आज हर होनी अनहोनी हो रही है

आज हर होनी अनहोनी हो रही है

सभ्यता की शक्ल रोनी हो रही है

बढ़ रही है खजूरों की ऊँचाई

हर गुलाबी नस्ल बौनी हो रही है


• राम

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