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मम्मी-पापा

तुझपे फ़िदा क्या करूं

कोई हरजाई बन गया

आखिर हम जीत गए...

... वो पत्थर ही होगा !!

चांद और मैं...

सूरज सा तेज हो आपमें...

इस क़दर उसका ऐतबार किया

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस

फिर से तू बच्चा कर दे...

शिकवा कोई दरिया की रवानी से नहीं...

... अब अच्छा हो गया कैसे?

फ़िज़ा में दूर तक मरहबा के नारे हैं