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जब तुम दफ्तर में नहीं होती

या तो मैं न रहूं या उससे मुझे मोहब्बत न रहे

जब मैंने पहली बार तुम्हें देखा था

एक पिता का बेटी से रिश्ता...

मज़ाक

जिंदगी

तुम ज़माने में ज़माने से जुदा लगते हो

नववर्ष पर मासूमियत की फ़रियाद

मोहब्बत खुद बताती है

हस्ती...

इम्तेहान...

इंतज़ार

मुझे कुछ और कहना था...