जब तुम दफ्तर में नहीं होती



कोई मैजिक नहीं होता
मन बेचैन सा रहता है
वक़्त बस यूं ही बीत जाता है
दफ्तर नौकरी काम और घर
बस यही होता है दिन दिनभर
जब तुम दफ्तर में नहीं होती

• राम

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