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मुझे कुछ और कहना था...

रंज

इक ज़माना हो गया

बेनाम-सा ये दर्द ठहर क्यों नहीं जाता

ये प्यारा सा जो रिश्ता है

यूं न मिल मुझसे...

कुछ इस तरह...

क्या मैं ही मिला था आज़माने के लिए..?

गुमनाम ही लिख दो

मेरे जन्मदिन पर पूज्य पिता को शब्दांजलि

...श्रद्धांजलि...

ऐसा नहीं कि मैंने मुस्कराना छोड़ दिया है

वो हम हैं!!!