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एक ग़ज़ल : झूठी आस बंधाने वाले

और तुम हमको खो दोगे

कभी अलविदा न कहना...

मोहब्बत...

मैं तो कहता हूँ वापस मत आना...!!!

तुम एक बार आकर समझा दो दिल को

वो ख़फ़ा है अब भी..!

आँखों में बसा ले मुझको

जग सूना-सूना लगता है

बेटी का सवाल..?

मेरी "माँ"

तेरे सिवा कुछ भी नहीं

ज़िंदगी को जुबान दे देंगे