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आँखों में बसा ले मुझको

जग सूना-सूना लगता है

बेटी का सवाल..?

मेरी "माँ"

तेरे सिवा कुछ भी नहीं

ज़िंदगी को जुबान दे देंगे

सपने...

मुस्कुराना है मेरे होंठों की आदत में शुमार

हम तो यूं ही जिए जा रहे थे

... अभी रहने दीजिए..!

ज़िंदगी ; एक अधूरी प्यास

ज़रा खुल के बरस...

हमसफ़र