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ऐ मेरे हमनशीं चल कहीं और चल

तो काहे का मैं

बाजारू नियम अब संबंधों पर भी लागू

वक्त के धरातल पर

मेरे सिवा शायर कई और भी हैं

परदा... सिनेमाई करिश्मा!

हर दिन मैं रचता हूँ एक कविता तुम्हारे लिए

आज हर होनी अनहोनी हो रही है

ज़िन्दगी तूने बहुत रोज़ बचाया मुझको

सुनेगा तेरी अरदास वो बड़े इत्मीनान से

मेरा पथरीला दिल...

कैसे कह दूँ कि वो पराया है

तुम्हें बिसराना चाहता हूं सदा के लिए