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फ़िज़ा में दूर तक मरहबा के नारे हैं

वाह! VALENTINES...

याद आऊंगा

मेरी दुआ है...

गणतंत्र दिवस की मंगलकामनाएं!!

वफ़ा आज़माई जाती है

कोई रोता रहा था याद होगा

काश! ताजमहल बन जाऊं..?

जिसे भूले वो सदा याद आया

मुझे सताना छोड़ दे

दुनिया तेरी रौनक़ से मैं अब ऊब रहा हूँ

आदत हो गई है..!

नया साल खुशियों का पैग़ाम लाए