अभी कुछ दिन पहले ही मैं दैनिक भास्कर के भोपाल संस्करण का सदस्य बना। भोपाल आते वक़्त ट्रेन में बैठे-बैठे मैं यही सोच रहा था कि अपना शहर, घर, अपने लोग, दोस्त, जाना पहचाना माहौल ये सब छोड़कर किसी और शहर में रहकर कर्म के पहिए को गति देना कितना चुनौतीपूर्ण होता होगा। भोपाल में रहते मुझे अभी महज़ एक हफ्ते ही हुए है लेकिन ऐसा बिलकुल नहीं लग रहा है कि मैं अपने घर, अपने शहर से दूर हूँ। यकीन मानिए, यहाँ मैं खुद को बिलकुल महफूज़ और बेहतर महसूस कर रहा हूँ। मेरे कार्यालय के तमाम लोग काफी अच्छे स्वाभाव के हैं। मुझसे बड़े मुझे काफी सिखाते हैं और मेरे सहकर्मी मेरी काफी मदद करते हैं। ऐसे बेहतरीन माहौल में मैं खुद को बहुत कम्फर्टेबल प् रहा हूँ। बस! दुआ कीजिए कि मैं इस संस्थान को आशा से भी बढकर सेवा और समर्पण दे पाऊं...
शुभेक्षु
रामकृष्ण गौतम
रामकृष्ण गौतम
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