कौन किसके क़रीब होता है
सबका अपना नसीब होता है
डूब जाते हैं नाव यूँ ही कभी
कौन किसका रक़ीब होता है
लोग कहते हैं प्यार पूजा है
वो भी तो बदतमीज़ होता है
आप कहते हैं कि मैं तन्हां हूँ
कोई तो दिल अज़ीज़ होता है
तकलीफ़ों के पुतले हैं हम
दर्द भी क्या अज़ीब होता है
आप गुमनाम हैं एसा तो नहीं
हर जगह एक हबीब होता है
ज़िंदगी एक नया तक़ाज़ा है
आदमी बदनसीब होता है
सबका अपना नसीब होता है
डूब जाते हैं नाव यूँ ही कभी
कौन किसका रक़ीब होता है
लोग कहते हैं प्यार पूजा है
वो भी तो बदतमीज़ होता है
आप कहते हैं कि मैं तन्हां हूँ
कोई तो दिल अज़ीज़ होता है
तकलीफ़ों के पुतले हैं हम
दर्द भी क्या अज़ीब होता है
आप गुमनाम हैं एसा तो नहीं
हर जगह एक हबीब होता है
ज़िंदगी एक नया तक़ाज़ा है
आदमी बदनसीब होता है
Comments
सुख के साथी मिले हजारों ही लेकिन ......
दुःख मै साथ निभाने वाला नहीं मिला .....
जब तक रही बहार उम्र की बगिया मैं.....
जो भी आया द्वारा, चाँद लेकर आया.......
पर जिस दिन झर गयी गुलाबों की पंखुरी .......
मेरा आंसूं मुझ तक आते शरमाया........
जिसने चाहा मेरे फूलों को चाहा ......
नहीं किसी ने लेकिन शूलों को चाहा ........
मेला साथ दिखाने वाले मिले बहुत .......
सूनापन बहलाने वाला नहीं मिला.........
सुख के साथी मिले हजारों ही लेकिन
दुःख मै साथ निभाने वाला नहीं मिला .....
रामराम.
हर साज़ की आवाज़ ही कुछ और है
शुरू होता है जब शेरोशायरी का दौर
'राम कृष्ण गौतम' की बात ही कुछ और है!"
बढ़ी लिखा है दोस्त! शुभकामनाएं!
आपका
DONTLUV