ये किसकी आहट थी जिसने मुझे सोने न दिया,
आशियाना लूट लिया इसपे भी रोने न दिया।
कारवां लेकर चला था मैं तो तेरी चौखट को,
मोती तेरे श्रृंगार को लाया पर तूने पिरोने न दिया।
कसमकस इतनी थी कि होश उड़ गए मेरे,
होश में लाने को अक्स मेरा तूने भिगोने न दिया।
बहार आई और एक पल में खो भी गई,
खोया मैं भी सरे राह पर गुमनाम ने खोने न दिया.
आशियाना लूट लिया इसपे भी रोने न दिया।
कारवां लेकर चला था मैं तो तेरी चौखट को,
मोती तेरे श्रृंगार को लाया पर तूने पिरोने न दिया।
कसमकस इतनी थी कि होश उड़ गए मेरे,
होश में लाने को अक्स मेरा तूने भिगोने न दिया।
बहार आई और एक पल में खो भी गई,
खोया मैं भी सरे राह पर गुमनाम ने खोने न दिया.
Comments
खोया मैं भी सरे राह पर गुमनाम ने खोने न दिया"
bahut sundar...
Saari panktiyan ek se badkar ek hai.
- ZAMEER -
आशियाना लूट लिया इसपे भी रोने न दिया।
bahut khoob sher hai.
badhiya !
आशियाना लूट लिया इसपे भी रोने न दिया।
bahut khoob sher hai.
badhiya !
www.gooftgu.blogspot.com