जब मैंने पहली बार तुम्हें देखा था



याद है जब मैंने पहली बार तुम्हें देखा था
तुम ऐसे शरमाई थी कि मैं देखता रह गया

इससे पहले जब भी मैं तुम्हें देखता था
तुम ठीक इसी तरह शरमाया करती थी

बारिश की वो फुहारें जब भी भिगाती थीं
तुम चुपके-चुपके पलकेें नीचे झुकाती थी

शायद तुम मुझे देखने की कोशिश करती थी
और मैं भी बस तुम्हें ही देखना चाहता था

कितनी खुश होती थी तुम जब मुझे देखती थी
मैं भी बस तुममें ही अपनी ख़ुशी देखता था

तुम्हें देखना, सुनना और बेहिसाब बातेें करना
यही तो मेरे हर दिन का काम हुआ करता था

तुम भी तो मेरे साथ रहना पसंद करती थी
मुझे देखने को तुम अपनी पलकें बंद करती थी

वक़्त ने अंगड़ाई ली और सारे मंज़र बदल गए
देखते ही देखते न जाने वो लम्हे कहाँ खो गए

वक़्त चलता रहा, मन मचलता रहा
मैं हर पल तड़पता रहा बस तुम्हारे लिए

हर जगह मेरी नज़रें बस तुम्हें ढूंंढ़ती
मैंने मांगी दुआएं, हर तरफ जलाए दीए

समझ ही न आया तुम कहां खो गई
मैं तड़पता रहा और तुम जुदा हो गई

• राम

Comments

kshama said…
Badee hee nafees aur bhav bheeni rachana hai!