दुआ दो हमें भी ठिकाना मिले
परिंदों को भी आशियाना मिले
तबियत से मिलें मुझे मेरे दोस्त
मेरे दोस्तों से ज़माना मिले
तरसता हूँ नन्हें से लब की तरह
तबस्सुम का कोई बहाना मिले
चला हूँ सफ़र में, मैं ये सोच के
कोई मीत बिछड़ा पुराना मिले
अभी तो लगी है झड़ी ही झड़ी
कभी कोई मौसम सुहाना मिले
परिंदों को भी आशियाना मिले
तबियत से मिलें मुझे मेरे दोस्त
मेरे दोस्तों से ज़माना मिले
तरसता हूँ नन्हें से लब की तरह
तबस्सुम का कोई बहाना मिले
चला हूँ सफ़र में, मैं ये सोच के
कोई मीत बिछड़ा पुराना मिले
अभी तो लगी है झड़ी ही झड़ी
कभी कोई मौसम सुहाना मिले
'किशन' मैं हूँ आशिक़ ज़रा दूसरा
मुझे काश कोई दीवाना मिले
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तबस्सुम का कोई बहाना मिले
चला हूँ सफ़र में, मैं ये सोच के
कोई मीत बिछड़ा पुराना मिले
Behad sundar rachana!
[nanhi pari ko bhoole to nahi hai na gutam uncle]
I still remember my sweetheart...
"रामकृष्ण"
Apka
DONTLUV
JUHI