मुझे पसंद नहीं है थकना!

ये और बात है कि तू नहीं मेरा अपना
मगर तू वही जिसका मैंने देखा था सपना

कहीं है आग कहीं बर्फ़ की दीवारें हैं
कहीं है धूप कहीं चुलबुली फुहारें हैं

कि कोई आ गया आवाज़ दे रहा है मुझे
उठा तो देखा कि झट से टूटा था मेरा सपना

चला ही जाता हूँ मैं हवा के साथ-साथ
ये मेरा जूनून है मुझे पसंद नहीं है थकना

Comments

Alpana Verma said…
बस इसी जूनून को बनाये रखिये..अच्छी रचना .
kshama said…
चला ही जाता हूँ मैं हवा के साथ-साथ
ये मेरा जूनून है मुझे पसंद नहीं है थकना
kya gazab kaha!
Unknown said…
ये और बात है कि तू नहीं मेरा अपना
मगर तू वही जिसका मैंने देखा था सपना|



Very Good Lines.




JUHI
Kya Likhte ho Gautam Bhai. Shubhkamnaen!




Apka

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