मैं आग हूँ
मेरे अन्दर छिपी है
असीमित ज्वाला,
काफी समय से मैंने
इस ज्वाला को भीतर ही
संभालकर रखा है,
जब भी देखता हूँ
इस दुनिया में बेकारी
ये ज्वाला फटने को
तैयार रहती है,
जब भी सुनता हूँ
किसी नेता की करतूत
ये ज्वाला उसे जलाने को
भड़क उठती है,
जब कभी होता है
मेरा ग़रीबी से सामना
हो जाता हूं निःशब्द
मेरी ज्वाला हर रोज़
भड़क उठती है
जब मैं देखता हूँ
सड़कों पर अतिक्रमण,
कई बार तो
इस ज्वाला को
रोकने की कोशिश में
मेरे ही हाथ
झुलस जाते हैं...
मेरे अन्दर छिपी है
असीमित ज्वाला,
काफी समय से मैंने
इस ज्वाला को भीतर ही
संभालकर रखा है,
जब भी देखता हूँ
इस दुनिया में बेकारी
ये ज्वाला फटने को
तैयार रहती है,
जब भी सुनता हूँ
किसी नेता की करतूत
ये ज्वाला उसे जलाने को
भड़क उठती है,
जब कभी होता है
मेरा ग़रीबी से सामना
हो जाता हूं निःशब्द
मेरी ज्वाला हर रोज़
भड़क उठती है
जब मैं देखता हूँ
सड़कों पर अतिक्रमण,
कई बार तो
इस ज्वाला को
रोकने की कोशिश में
मेरे ही हाथ
झुलस जाते हैं...

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