कुछ रिश्ते नहीं चाहते कोई नाम
बस चाहते हैं एक अदद सुकून
जैसे दुनिया की भरी भीड़ में
कोई चुपचाप पास बैठ जाए
और व्याकुल मन को शोर से बचाए
तुम्हारे साथ भी शायद
कुछ ऐसा ही जुड़ाव है
न कोई दावा, न अधिकार
न इज़हार की बेकरारी
न इकरार का दिखावा
न इनकार का डर
बस इतना कि
तुम्हारे साथ बिताया हर पल
लगता है अलग
लगता है सहज
थोड़ा सच्चा
थोड़ा अपने जैसा
तुम्हारी बातें, तुम्हारी आदतें
छोटी-छोटी पसंद
प्यारी सी मुस्कान
बेवजह चाय पी लेने की आदत
सच कहूं तो बिना किसी दावे के
तुमने मेरे मन के किसी शांत कोने में
खुद ब खुद बना ली है अपनी खास जगह
लेकिन सुनो…
अगर कभी मेरी मौजूदगी
तुम्हें असहज करे
अगर इस रिश्ते की नाजुक सी आहट भी
तुम्हारे मन पर रखे कोई बोझ
तो बेझिझक मुझसे कह देना
मैं तुम्हारे हर ऐतराज को
हंसते हुए रखूंगा सिर माथे पर
मैं तुम्हें रोकूँगा नहीं
किसी बात पर टोकूँगा नहीं
मान जाने की जिद भी नहीं करूँगा
बस तुम्हारी मर्जी को
अपनी हर चाहत से ऊपर रखूँगा
क्योंकि तुम्हारा खुश रहना
तुम्हारा मुस्कुराते रहना
मेरे लिए भगवान की
इबादत करने जैसा है
फिर भी अगर हम
समय के तेज भागते पलों में
यूं ही हमसाया बने रहे
तो यक़ीन मानो
मैं इस जुड़ाव को भी
ईश्वर की अलौकिक कृपा समझूँगा
और हां... ये भी याद रखना
कुछ लोग प्रेमी नहीं होते
फिर भी जीवन में प्रेम
का रस घोल देते हैं...
शायद हमारा रिश्ता
कुछ-कुछ वैसा ही है !
• रामकृष्ण गौतम, भोपाल

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