मुसाफिर से पूछिए



01.
खौफ है कि ज़ख्म देख ना कोई
ख़्वाहिश है कि कोई देखने वाला हो !
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02.
मंज़िल का मिल जाना इतना भी आसान नहीं होता
रास्ते क्या-क्या छीन लेते हैं ये मुसाफिर से पूछिए

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