झांकके मन में जो देखा तो मुलाकात हुई

आईना सामने रखकर जो कभी बात हुई
अपने ही अक्स पे सवालों की बरसात हुई

ढूंढ़ता फिरता था दुनिया में जिसे बरसों से
झांकके मन में जो देखा तो मुलाकात हुई

• रामकृष्ण गौतम, भोपाल

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