फकीरों से हमेशा ही निभी है दोस्ती मेरी



यही सच है मुझे कोई अदाकारी नहीं आती
इसी कारण ही पर्दे पर मेरी बारी नहीं आती

हमेशा सामने तारीफ गाली पीठ के पीछे
अजी मुझको फ़क़त ये ही तो फनकारी नहीं आती

कि मेरे चेहरे पर वक़्त की सिलवट भले ही हो
मैं फक्कड़ हूं फकीरों को दुनियादारी नहीं आती

फकीरों से हमेशा ही निभी है दोस्ती मेरी
मगर व्यापारियों से रास हां यारी नहीं आती

• रामकृष्ण गौतम, भोपाल

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