उनकी चाह, हमारा गुरूर on December 02, 2010 Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps वो इस चाह में रहती हैं कि हम उनको उनसे मांगें,और हम इस गुरूर में हैं कि हम अपनी ही चीज़ उनसे क्यों मांगें!!! Comments सुरेन्द्र सिंह " झंझट " said… andar ki baat hai..aapas me suljhayen... achchhi post! विजय तिवारी " किसलय " said… उत्तम भाव .अच्छा लगा.हिन्दी साहित्य संगम जबलपुर
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aapas me suljhayen...
achchhi post!
अच्छा लगा.
हिन्दी साहित्य संगम जबलपुर