ॐ इस ब्लॉग की पहली पोस्ट

एक दिन जब मेरे अंदर
इकट्ठी हो गई आग
सोचा सूरज बन जाऊं






एक दिन जब मेरे दर्द
बन गए आंसू
सोचा समंदर बन जाऊं

एक दिन जब मैं
झरने से नदी और

नदी से हो गया समुंदर
सोचा आकाश बन जाऊं

एक दिन जब इच्छाओं
के रंग बन गए इंद्रधनुष
सोचा तितली बन जाऊं

एक जब मुखर हुईं
मेरी संवेदनाएं
सोचा वाल्मीकि बन जाऊं

अब मेरे हाथ में कलम है
सोचता हूं क्यों न
कवि बन जाऊं

• ॐ

Comments

Anonymous said…
welcome
Alpana Verma said…
yah to bahut bura hua..ki purana blog hack ho gya..

-koi baat nahin ab yahan nayee post likhiye.
shama said…
Anek shubhkamnaon sahit swagat hai!
kshama said…
Snehil swagat hai!
My World said…
ओये! ये क्या हो गया यार... सो सेड बडी! वेल, ये ब्लॉग भी काफी अच्छा है! कीप राइटिंग! गुड लक!