मालूम है उसे अगला वार कहां करना है



दाम कहां देना है उधार कहां करना है
मालूम है उसे अगला वार कहां करना है
देता है दिलासा वो शख्स मेरी बर्बादी पर
वाकिफ है बहुत खूब कि व्यापार कहां करना है

• रामकृष्ण गौतम

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