लोग कहते हैं तुम्हारा अंदाज़ शायराना हो गया है
अब क्या बताएं कितने ज़ख्म खाए हैं इस दिल पर तब जाकर ये अंदाज़ पाया है
हर लफ़्ज़ में जज़्बातों की जो नमी सी ले आता हूं
वो यूं ही नहीं, वक़्त की हर ललकार को शिद्दत से निभाया है
कभी ख़ामोशियों ने चीख़ बनकर सीने को चीर डाला
कभी अपनों की बेरुख़ी ने गैरों से भी ज़्यादा रुलाया है
ये जो सलीका है जज़्बातों को काग़ज़ पर उतारने देने का
हर हर्फ़ ने तन्हाई में खुद को कई दफ़ा आज़माया है
अब हर शेर में बस इश्क़ नहीं, हक़ीक़त भी बोलती है
हमने ठोकरों को उस्ताद बनाकर ये हुनर कमाया है
'गौतम' अब तालीम-ए-मोहब्बत का हासिल बस इतना समझो
जो टूटकर भी मुस्कुरा दे वही असल में शायर कहलाया है
• राम कृष्ण गौतम
Comments