राधा और कृष्ण का रिश्ता
कभी शब्दों में पूरा नहीं कहा गया
जो था, वही था
जो महसूस किया गया
ना साथ की शर्त
ना पाने की जिद
फिर भी एक-दूसरे के बिना
कुछ भी पूरा नहीं था
कृष्ण जहां रहे
राधा वहीं रही
हर अहसास में
हर सांस में
ये प्रेम आसान नहीं था
इसमें मिलन कम
विरह ज़्यादा थी
पास कम
विश्वास ज़्यादा था
और अधिकार से ज्यादा
त्याग था
ना जाने
लोग इस प्रेम कथा को
अधूरा क्यों कहते हैं
सच तो ये है कि
जो कभी खत्म न हो
वो अधूरा नहीं
अनंत होता है
ये रिश्ता सिखाता है कि
प्रेम साथ रहने का नाम नहीं
किसी के भीतर बस जाने का नाम है
• राम कृष्ण गौतम

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