यही मेरा अभिशाप है, यही मेरा वरदान है
भावनाओं को अलग तरीके से समझता हूं
शायद कुदरत से ही ये गुण मुझे प्रदान है
भीड़ में रहकर भी भीड़ सा नहीं होता
मेरी सांसों की धड़कन भी मुझसे अनजान है
जो नहीं कहते लफ़्ज़, वो भी सुन लेता हूं मैं
मेरी खामोशी ही मेरा बयान है
दर्द को भी मुस्कुराकर गाने लगा हूं अब
मेरे हिस्से का सुकून भी इससे हैरान है
कोई समझे या न समझे, फर्क अब पड़ता नहीं
मेरे भीतर ही मेरा एक अलग जहान है
ये नज़र, ये सोच यूं ही नहीं मिली हमारी
किसी अधूरी कहानी की ये पूरी दास्तान है
• राम कृष्ण गौतम
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