निगाहें निगाहों से मिलाकर तो देखो
नए लोगों से रिश्ता बनाकर तो देखो
हसरतें दिल में छिपाने से क्या फायदा
अपने होठों को हिलाकर तो देखो
खामोशी से कब होती हैं ख्वाहिशें पूरी
दिल की बात बताकर तो देखो
जो है दिल में उसे कर दो बयां
ख़ुद को एक बार जताकर तो देखो
आसमां सिमट जाएगा आगोश में तुम्हारी
चाहत की बाहें फैलाकर तो देखो
दिल की बात बताकर तो देखो..!
( करीब 5 साल ये कविता मेरे मोबाइल नम्बर पर Hello Tune रही है, मगर आज तक ये मेरे लिए अनाम ही है। )

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