वो 90's वाला लड़का...



90's वाली Vibe…

सैंतीस की उम्र तक आते-आते
ज़िम्मेदारियों की गठरी कंधों पर
लेकर सरपट दौड़ रहा है
वो आवारा लड़का
जो कभी एक सौ दस की रफ़्तार से
बाइक उड़ाया करता था

जिसकी दोपहरें
क्रिकेट और कैरम में बीतती थीं
और शामें
गली के किसी मोड़ पर
दोस्तों के साथ ठहाकों में

जिसे
न वाई-फाई चाहिए था
न सोशल मीडिया की झंझट
फिर भी पूरी दुनिया
घर की चौखट पर पड़ी रहती थी

जिसके लिए
पिता की डांट जिंदगी का सबक था
और मां की आवाज़
दिनभर की थकान का मरहम

गुरुओं के सामने
खुद-ब-खुद झुक जाती थीं आंखें
और बड़ों का आशीर्वाद
किसी ईनाम से कम नहीं था

जिसने
कम संसाधनों में भी
ज़िंदगी को जीभर जीया है
मिट्टी में गिरकर उठना
हारकर भी हंस देना
हार्टब्रेक को सेलिब्रेट करना
छोटी-सी खुशी में भी
जलसा करना उसे आता था

आज जेब में स्मार्टफोन है
पर अपनों से बात करने का टाइम नहीं
नौकरी बाइक कार घर सब है
पर साथ रहने वाले कोई नहीं
दोस्त अभी भी हैं
पर मुलाक़ातें
अब नोटिफिकेशन में बदल गई हैं

वो आवारा लड़का…
जो कभी हवा से बातें करता था
उसमें अभी भी है 90's वाली Vibe
उसमें आज भी ज़िंदा है वो लड़का 
जो मौका मिलते ही सड़क पर
फिर दौड़ाना चाहता है
सौ की स्पीड से बाइक
करना चाहता है हवा से बातें...

• राम कृष्ण गौतम

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