सोच के अनुसार सब होता नहीं है



सोच के अनुसार सब होता नहीं है
समय किसी के हाथ का तोता नहीं है 
फसल काटने तो सब तैयार रहते हैं
बीज कोई हाथ से बोता नहीं है

यूं ही नहीं लहलहाता कोई खेत रातोंरात
रखवाली में किसान कई रात सोता नहीं है
सिर्फ सोचने से नहीं मिल जाती कोई चीज़
बिना किए दुनिया में कुछ भी होता नहीं है

• राम

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